तियानजिन (चीन) में हुए शंघाई योगदान संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में इस बार हिंदुस्तान के पीएम मोदी केंद्र में नजर आए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ दबाव और वर्चस्ववादी नीति के बीच, मोदी ने न सिर्फ़ आतंकवाद के मामले पर वैश्विक समर्थन जुटाया बल्कि रूस और चीन के साथ हिंदुस्तान की मजबूत तिकड़ी का भी प्रदर्शन किया.
आतंक के मामले पर हिंदुस्तान की कूटनीतिक जीत
सम्मेलन में मोदी ने पहलगाम आतंकवादी हमले का मामला उठाते हुए आतंकवाद के विरुद्ध कठोर कदम की मांग की. उनकी पहल पर रूस और चीन सहित 20 राष्ट्रों की मौजूदगी में एससीओ ने संयुक्त घोषणा पत्र जारी कर हमले की निंदा की. साथ ही, अपराधियों और प्रायोजकों को सजा दिलाने की मांग भी की गई. यह हिंदुस्तान की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी रही. बैठक के दौरान पाक के पीएम शहबाज शरीफ असहज और लाचार नजर आए. मोदी जब अपने संबोधन में पाक प्रायोजित आतंकवाद पर बोल रहे थे, उस समय शरीफ सिर झुकाए बैठे रहे.
मोदी-पुतिन की निजी केमिस्ट्री ने दिया संदेश
समिट से इतर प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दोस्ताना फोटोज़ वैश्विक मीडिया की सुर्खियां बन गईं. पुतिन की पहल पर मोदी उनकी कार में बैठकर होटल पहुंचे और दोनों नेताओं के बीच पौन घंटे की गहन वार्ता हुई. इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों से लेकर यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा हुई. मोदी ने शांति को इन्सानियत की पुकार बताते हुए युद्ध समाप्त करने के प्रयासों की सराहना की. पुतिन ने मोदी को “प्रिय दोस्त” कहकर संबोधित किया, जबकि मोदी ने उन्हें हिंदुस्तान आने का न्योता दिया और बोला कि 140 करोड़ भारतीय उनके स्वागत के लिए उत्सुक हैं. रूसी मीडिया ने इसे “दो पुराने दोस्तों की केमिस्ट्री” करार दिया.
नया शक्ति संतुलन और अमेरिकी असहजता
सम्मेलन में मोदी, पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तिकड़ी ने अमेरिका को नए वैश्विक शक्ति संतुलन का साफ संदेश दिया. यह तस्वीर ऐसे समय आई जब ट्रंप हिंदुस्तान पर पेनल्टी टैरिफ थोप चुके हैं और उन्हें अपने राष्ट्र में आलोचना झेलनी पड़ रही है. भारतीय पीएम की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता ने ट्रंप को सफाई देने पर विवश कर दिया. अमेरिकी मीडिया ने भी इसे ट्रंप की असफलता बताते हुए लिखा कि उनकी नीतियों से भारत-अमेरिका रिश्तों में दरार आई है और हिंदुस्तान चीन-रूस के और करीब आ रहा है.
एससीओ शिखर सम्मेलन में मोदी की किरदार ने हिंदुस्तान की वैश्विक स्थिति को और मजबूत किया. आतंकवाद के विरुद्ध एकजुटता दिलाने से लेकर रूस और चीन के साथ नए समीकरण बनाने तक, मोदी ने बहुध्रुवीय दुनिया की तस्वीर को और साफ कर दिया. दूसरी ओर, पुतिन संग उनकी निजी दोस्ती और “प्रिय दोस्त” वाले संबोधन ने भारत-रूस रिश्तों में नयी ऊर्जा का संचार किया.
यह सम्मेलन केवल एशिया ही नहीं, बल्कि दुनिया में शक्ति संतुलन की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है