चीन की सैन्य ताकत तेज़ी से बढ़ रही है. हाल ही में बीजिंग में हुई भव्य सैन्य परेड ने दुनिया का ध्यान खींचा. इस परेड में चीन ने अपने कई उन्नत हथियारों का प्रदर्शन किया, जिनमें से कुछ अमेरिका तक पहुँचने में सक्षम हैं. दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस परेड से बहुत नाराज़ दिखे. वे इसे चीन, रूस और उत्तर कोरिया की दोस्ती को अमेरिका के ख़िलाफ़ साज़िश मानते हैं. आइए जानते हैं इन हथियारों की क्षमताएँ और ट्रंप की नाराज़गी की वजह.
चीन की सैन्य ताकत: एक अवलोकन
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है. 2025 तक चीन के पास लगभग 600 परमाणु हथियार होंगे, जिनकी संख्या तेज़ी से बढ़ रही है. ये हथियार मुख्य रूप से बैलिस्टिक मिसाइलों, पनडुब्बियों और बमवर्षक विमानों में तैनात हैं. चीन का ध्यान एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर है, लेकिन अब उसकी कुछ मिसाइलें अमेरिका की मुख्य भूमि तक पहुँच सकती हैं. अमेरिकी रक्षा विभाग की 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन की मिसाइलें अमेरिकी तटों को निशाना बना सकती हैं. खासकर यदि ताइवान या दक्षिण चीन सागर में कोई संघर्ष हो. इन हथियारों को रक्षात्मक उद्देश्यों के लिए बोला जाता है, हालाँकि अमेरिका इन्हें एक ख़तरा मानता है.
चीन के हथियारों की क्षमताओं को समझने के लिए, हम उन्हें श्रेणियों में विभाजित करते हैं. नीचे एक तालिका दी गई है जो इन हथियारों की सीमा, प्रकार और अमेरिका पर उनके असर को दर्शाती है. ये आँकड़े रैंड कॉर्पोरेशन और अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों से लिए गए हैं.
ये हथियार चीन की “पहले इस्तेमाल न करने” की नीति के अनुसार हैं, लेकिन अमेरिका का मानना है कि ताइवान जैसे संकट में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है. DF-41 मिसाइलें न्यूयॉर्क या लॉस एंजिल्स जैसे अमेरिकी शहरों तक पहुँच सकती हैं. JL-3 को एक पनडुब्बी से प्रक्षेपित किया जाता है, जो चुपके से अमेरिकी तटों तक पहुँच सकती है. DF-17 जैसे हाइपरसोनिक हथियार अमेरिकी मिसाइल सुरक्षा को भेद सकते हैं क्योंकि ये बहुत तेज़ और युद्धाभ्यास में आसान होते हैं.
इन हथियारों की क्षमताएँ कैसे काम करती हैं?
ICBM (DF-31A/DF-41): इन्हें ज़मीन से प्रक्षेपित किया जाता है. DF-41 10 से ज़्यादा हथियार ले जा सकता है, जो एक साथ कई लक्ष्यों पर धावा कर सकते हैं. इनकी मारक क्षमता इतनी ज़्यादा है कि इन्हें चीन से लॉन्च करके 30-40 मिनट में अमेरिका पहुँचा जा सकता है. लेकिन अमेरिका के पास THAAD जैसी मिसाइल रक्षा प्रणालियाँ हैं, जो इन्हें रोक सकती हैं. SLBM (JL-3): पनडुब्बी से लॉन्च किया जा सकता है. ये अमेरिकी तट पर अचानक धावा कर सकते हैं, क्योंकि पनडुब्बियों का पता लगाना कठिन होता है. चीन के पास ऐसी 6 पनडुब्बियाँ हैं.
बॉम्बर (H-6N): ये विमान हवा में ईंधन भरकर लंबी दूरी तय कर सकते हैं. ये क्रूज़ मिसाइल या परमाणु बम गिरा सकते हैं. लेकिन अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली इन्हें रोक सकती है. हाइपरसोनिक और FOBS: ये नयी तकनीकें हैं. हाइपरसोनिक मिसाइलें ध्वनि से भी तेज़ उड़ती हैं, इसलिए इनका पता लगाना कठिन होता है. FOBS कक्षा में चक्कर लगाते हैं और दक्षिणी ध्रुव से धावा कर सकते हैं, जो अमेरिकी रडार की पकड़ से बच जाता है.
ये हथियार चीन की एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल (A2/AD) रणनीति का हिस्सा हैं, जो अमेरिकी नौसेना को चीन के पास आने से रोकता है. लेकिन एक पूर्ण युद्ध में, अमेरिका की सैन्य शक्ति और भी ज़्यादा है – उसके पास 5,000 से ज़्यादा परमाणु हथियार हैं. फिर भी, चीन की तेज़ी से बढ़ती क्षमता चिंता का विषय है.
ट्रंप नाराज़ क्यों हैं? परेड का कारण
3 सितंबर 2025 को, चीन ने द्वितीय विश्व युद्ध में जापान पर अपनी विजय की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में बीजिंग के तियानमेन चौक पर एक भव्य सैन्य परेड का आयोजन किया. इसमें 50,000 से ज़्यादा सैनिक, टैंक, मिसाइल और ड्रोन शामिल थे. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बोला कि चीन धमकियों से नहीं डरता. परेड में नए हथियार, जैसे DF-5C अंतरमहाद्वीपीय परमाणु मिसाइल, हाइपरसोनिक मिसाइलें (YJ-21, DF-17), लेज़र वायु रक्षा प्रणालियाँ और रोबोट डॉग ड्रोन शामिल थे.
परेड में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग उन भी शामिल हुए – पहली बार तीनों नेता एक साथ देखे गए. अन्य मेहमानों में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, पाक के पीएम शहबाज़ शरीफ़ और कई एशियाई नेता शामिल थे. अमेरिका या पश्चिमी राष्ट्रों का कोई बड़ा नेता नहीं आया. शी जिनपिंग ने इसे विश्व फासीवाद-विरोधी युद्ध की स्मृति के रूप में प्रस्तुत किया.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि कृपया व्लादिमीर पुतिन और किम जोंग उन को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ भेजें क्योंकि आप अमेरिका के विरुद्ध षड्यंत्र रच रहे हैं. साजिश का आरोप: ट्रंप का मानना है कि यह परेड अमेरिका के विरुद्ध उथल-पुथल की धुरी है. रूस-चीन-उत्तर कोरिया गठबंधन यूक्रेन युद्ध और ताइवान तनाव में अमेरिका को चुनौती दे रहा है.
अमेरिकी किरदार की अनदेखी: ट्रंप ने बोला कि द्वितीय विश्व युद्ध में चीन की जीत में अमेरिका का बड़ा सहयोग था (जैसे कि लेंड-लीज सहायता), लेकिन शी जिनपिंग ने इसका ज़िक्र नहीं किया. ट्रंप ने बोला कि चीन को हमारी आवश्यकता है और शी जिनपिंग के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं.
ट्रंप का FOMO (छूट जाने का डर): ट्रंप ने स्वीकार किया कि उन्होंने परेड देखी और इसे “बहुत प्रभावशाली” बताया, लेकिन बोला कि चीन ने अमेरिका को दिखाने के लिए ऐसा किया. जून 2025 में ट्रंप की अपनी जन्मदिन परेड फीकी पड़ गई, जबकि चीन के प्रदर्शन ने दुनिया को चकाचौंध कर दिया.
राजनीतिक संदर्भ: चीन ट्रंप की टैरिफ नीति के दबाव में है, लेकिन परेड चीन को एक वैश्विक नेता के रूप में पेश करती है. ट्रंप इसे अपनी विदेश नीति की विफलता मानते हैं. ट्रंप ने बोला कि यह एक खूबसूरत कार्यक्रम था, लेकिन उन्हें आशा थी कि मैं देख रहा हूँ – అర్ मैं देख रहा था. क्रेमलिन ने इसे एक साज़िश बताकर खारिज कर दिया.
ये चीनी हथियार अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती हैं, लेकिन पूर्ण युद्ध की आसार कम है. दोनों राष्ट्र परमाणु शक्ति संपन्न हैं, इसलिए संतुलन बना हुआ है. परेड ने चीन की बढ़ती ताकत को दर्शाया, लेकिन ट्रंप का गुस्सा उनकी सियासी रणनीति का हिस्सा लगता है. अमेरिका को अपनी सैन्य क्षमताएँ बढ़ानी होंगी, जैसे मिसाइल रक्षा और सहयोगियों (जापान, ताइवान) के साथ साझेदारी.