पीएम मोदी ने शुक्रवार को त्रिनिदाद और टोबैगो में हिंदुस्तान के अंतरिक्ष कार्यक्रम की सराहना की. उन्होंने बोला कि हिंदुस्तान ने चंद्रमा पर चंद्रयान-3 के उतरने की स्थान का नाम ‘शिव शक्ति बिंदु’ रखा.
त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “इस समय एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर उपस्थित है. हम अब ‘गगनयान’ नाम के मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन पर काम कर रहे हैं. जल्द ही एक भारतीय चंद्रमा पर कदम रखेगा और हिंदुस्तान का स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन भी होगा.”
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बोला कि हिंदुस्तान अपनी सफलताओं का लाभ दुनिया के बाकी राष्ट्रों के साथ बांट रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मुझे भरोसा है कि आप सभी को हिंदुस्तान की तरक्की पर गर्व है. आज का नया हिंदुस्तान इतना आगे बढ़ रहा है कि अब उसके लिए आसमान भी कोई सीमा नहीं है. जब चंद्रयान चंद्रमा पर उतरा था, तो आप सब ने जरूर खुशी मनाई होगी. जिस स्थान चंद्रयान उतरा था, हमने उसका नाम ‘शिव शक्ति बिंदु’ रखा है.”
प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो में रहने वाले भारतीय समुदाय की सराहना की और उन्हें ‘राष्ट्रदूत’ और ‘भारतीय मूल्यों और संस्कृति के प्रतिनिधि’ कहा.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हम अपने प्रवासी हिंदुस्तानियों की ताकत और समर्थन को बहुत अहम मानते हैं. दुनिया के भिन्न-भिन्न हिस्सों में रहने वाले 3.5 करोड़ से ज़्यादा भारतीय प्रवासी हमारे लिए गर्व की बात हैं. जैसा कि मैं अक्सर कहता हूं, आप में से हर एक आदमी हिंदुस्तान के मूल्यों, संस्कृति और विरासत का प्रतिनिधि है—एक सच्चा राष्ट्रदूत.”
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा, “इस वर्ष जब हमने भुवनेश्वर में प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन किया, तो त्रिनिदाद और टोबैगो की राष्ट्रपति क्रिस्टीन कार्ला कंगालू हमारी मुख्य मेहमान थीं. कुछ वर्ष पहले, वहां की पीएम कमला प्रसाद-बिसेसर ने भी अपनी उपस्थिति से हमें सम्मानित किया था.”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “प्रवासी भारतीय दिवस पर मैंने पूरे विश्व में बसे गिरमिटिया समुदाय को सम्मान देने और उनसे जुड़ने के लिए कई पहल प्रारम्भ करने की घोषणा की. हम अतीत की जानकारी जुटा रहे हैं और एक बेहतर भविष्य के लिए लोगों को एक-दूसरे से जोड़ रहे हैं. हम गिरमिटिया समुदाय का एक बड़ा और व्यवस्थित डाटा तैयार करने पर काम कर रहे हैं. इसके अनुसार हम उन गांवों और शहरों का रिकॉर्ड बना रहे हैं जहां से उनके पूर्वज हिंदुस्तान से गए थे और उन राष्ट्रों या जगहों की पहचान कर रहे हैं, जहां वे जाकर बसे थे. ”
उन्होंने आगे कहा,” हम उनके इतिहास और विरासत के संरक्षण के लिए भी काम कर रहे हैं. साथ ही, हम नियमित रूप से ‘विश्व गिरमिटिया सम्मेलन’ आयोजित करने की योजना पर भी काम कर रहे हैं. इससे त्रिनिदाद और टोबैगो में रहने वाले हमारे भाइयों और बहनों से हमारा ऐतिहासिक और भावनात्मक रिश्ता और मजबूत होगा.