नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर इस महीने रूस की यात्रा पर जा रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात अपने समकक्ष सर्गेई लावरोव से होगी। यह मुलाकात 21 अगस्त को मॉस्को में तय है। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब हिंदुस्तान और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर तनाव बढ़ा है। पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिंदुस्तान पर पेनाल्टी के रूप में 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया। जिससे कुछ उत्पादों पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया। वाशिंगटन का इल्जाम है कि नयी दिल्ली रूस से कच्चा ऑयल खरीदकर मॉस्को के युद्ध को परोक्ष रूप से सहायता दे रही है। इस कदम से द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों में खटास आना तय बताया जा रहा है।
भारत ने इन आरोपों को हमेशा खारिज किया है और साफ किया है कि ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय भलाई में है। साथ ही रूस के साथ दशकों पुराना भरोसेमंद रिश्ता किसी दबाव में आकर समाप्त नहीं होगा। यही कारण है कि अमेरिका के आर्थिक वार के बीच हिंदुस्तान ने अपनी कूटनीतिक चहल-पहल और बढ़ा दी है।
पिछले सप्ताह पुतिन से मिले थे डोभाल
पिछले सप्ताह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मास्को जाकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। क्रेमलिन ने दोनों नेताओं की मुलाकात का वीडियो जारी किया, हालांकि वार्ता की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई। डोभाल ने इस दौरान पुतिन के हिंदुस्तान दौरे की पुष्टि भी की, जो वर्ष के अंत तक होने की आसार है।
भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में गहरे संबंध रहे हैं। जानकार मानते हैं कि जयशंकर की यह यात्रा सिर्फ़ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि अमेरिका को यह साफ संदेश है कि नयी दिल्ली अपनी विदेश नीति स्वतंत्र रूप से तय करती है।
मॉस्को में होने वाली वार्ता में ऑयल व्यापार, हथियार समझौते और बहुपक्षीय मंचों पर योगदान जैसे मामले अहम रहेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मुलाकात के बाद अमेरिका के साथ तनाव और बढ़ेगा या कोई संतुलित रास्ता निकल पाएगा।